Mungagan Songtext
von Ali Azmat
Mungagan Songtext
ये गगन-गगन अँधियारे, ये जलते-बुझते सितारे
दूरी में डूबे किनारे, अनदेखे जहान ये सारे
मैं तो ना जानूँ, मंज़िल है या ये ख़ुद का निशाँ है?
ये गगन-गगन अँधियारे, ये जलते-बुझते सितारे
दूरी में डूबे किनारे, अनदेखे जहान ये सारे
मैं तो ना जानूँ, मंज़िल है या ये ख़ुद का निशाँ है?
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी, खो गई कहकशाँ
ये धुँधली-सी तस्वीरें, ये मिटती हुई तहरीरें
सब अज़ल-अबद की लकीरें, हैं उलझी हुई ज़ंजीरें
आइना पूछे, "चेहरे हैं या ये परछाइयाँ है?"
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी, खो गई कहकशाँ
है क्या, है क्या, है क्या, है क्या...
है क्या, है क्या, है क्या, है क्या...
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी...
ये गगन-गगन अँधियारे...
दूरी में डूबे किनारे, अनदेखे जहान ये सारे
मैं तो ना जानूँ, मंज़िल है या ये ख़ुद का निशाँ है?
ये गगन-गगन अँधियारे, ये जलते-बुझते सितारे
दूरी में डूबे किनारे, अनदेखे जहान ये सारे
मैं तो ना जानूँ, मंज़िल है या ये ख़ुद का निशाँ है?
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी, खो गई कहकशाँ
ये धुँधली-सी तस्वीरें, ये मिटती हुई तहरीरें
सब अज़ल-अबद की लकीरें, हैं उलझी हुई ज़ंजीरें
आइना पूछे, "चेहरे हैं या ये परछाइयाँ है?"
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी, खो गई कहकशाँ
है क्या, है क्या, है क्या, है क्या...
है क्या, है क्या, है क्या, है क्या...
है क्या तू बता, ये ज़मीं-आसमाँ?
हर मकाँ ला-मकाँ, हर निशाँ बे-निशाँ
बे-ख़बर सब यहाँ, तू कहाँ, मैं कहाँ
खो गया चाँद भी...
ये गगन-गगन अँधियारे...
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