Iron Will Songtext
von Prince Sethi
Iron Will Songtext
अकेले बैठकर रातों को रोज़ यही सोचता हूँ कि आखिर अब क्या करूँ,
दिल कहता है कि इस दुनिया की सारी झूठी मोह-माया त्याग दूँ।
पर ये दिमाग कहता है कि अभी संघर्ष का एक और दौर बाकी है,
ताकि मेहनत के दम पर मैं अपने आने वाले कल में कोई नया रंग भर दूँ।
मेरा मुश्किलों भरा ये सफर अभी यहाँ पर खत्म नहीं हुआ है,
मेरी असली मंज़िल का मुकाम तो अभी यहाँ से बहुत दूर है।
हार मानकर घर बैठने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता मेरे दोस्त,
क्योंकि मेरा इरादा आज भी चट्टान की तरह अटल और मज़बूत है।
कोशिश तो बहुत की कि दिल का हाल दुनिया जान ले,
मेरे लिखे हर शब्द को ज़माना पहचान ले।
अरमान भले खाक हुए, पर हिम्मत अभी हारी नहीं,
रब चाहेगा तो एक दिन मेरी कलम का लोहा सब मान लेंगे।
तूफानों के रुख को मोड़ना ही मेरी असली निशानी है,
कठिन संघर्षों के पन्नों पर लिखी मेरी कहानी है।
बाधाएं तो बस इम्तिहान लेती हैं मेरे अटूट सब्र का,
हार को धूल चटाना ही ′सेठी' की असली जवानी है।
माना कि हम थोड़े धीमे हैं, पर मैदान में डटकर खड़े रहेंगे,
जब तक रगों में जान है, हम अपने नाम के लिए लड़ेंगे।
मैदान छोड़कर भाग जाना, हमारी आदत में नहीं सेठी,
जब तक साँसें चलेंगी, हम ज़िद बनकर दुनिया में चमकेंगे।
इन आँखों में अब हमने, कुछ सुनहरे सपने सजा लिए हैं,
पुरानी लकीरें मिटाकर, हमने नए रास्ते बना लिए हैं।
अब बातों का समय नहीं रहा, बस कुछ कर दिखाने की बारी है,
सफलता की खातिर हमने, अपने दिन-रात जला लिए हैं।
जो गिरकर संभलना जानते हैं, वही ऊँची उड़ान भरते हैं,
अपना हुनर छिपाकर रखते हैं, जो समझदारी से काम करते हैं।
जब खुद सीख रहे हो उड़ना, तो सबको ज्ञान मत देना,
मंज़िल वही पाते हैं, जो अपनी सीमा में आगे बढ़ते हैं।
इरादों में जान हो तो पत्थर भी पानी बन जाता है,
सच्चा जुनून ही मंज़िल की असली निशानी बन जाता है।
′सेठी' को ज़रूरत नहीं किसी जिस्मानी ताकत की,
जब हौसला बुलंद हो तो हर शख्स तूफानी बन जाता है।
जब वो चढ़ने लगी और रूह को तंग करने लगी,
सुकून के बदले ज़िंदगी में जंग करने लगी।
हौसला कर के मैंने उसे खुद से दूर कर दिया,
जब वो शराब मेरी साख को बेरंग करने लगी।
भटकने लगी थी राहें और होश भी तंग करने लगे थे,
मेरे अपने ही साये मुझसे अब जंग करने लगे थे।
हद से गुज़रने लगी थी जब वो बेहिसाब मदहोशियाँ,
तो हमने भी खुद को रोक लिया और इरादे बुलंद करने लगे थे।
दिल कहता है कि इस दुनिया की सारी झूठी मोह-माया त्याग दूँ।
पर ये दिमाग कहता है कि अभी संघर्ष का एक और दौर बाकी है,
ताकि मेहनत के दम पर मैं अपने आने वाले कल में कोई नया रंग भर दूँ।
मेरा मुश्किलों भरा ये सफर अभी यहाँ पर खत्म नहीं हुआ है,
मेरी असली मंज़िल का मुकाम तो अभी यहाँ से बहुत दूर है।
हार मानकर घर बैठने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता मेरे दोस्त,
क्योंकि मेरा इरादा आज भी चट्टान की तरह अटल और मज़बूत है।
कोशिश तो बहुत की कि दिल का हाल दुनिया जान ले,
मेरे लिखे हर शब्द को ज़माना पहचान ले।
अरमान भले खाक हुए, पर हिम्मत अभी हारी नहीं,
रब चाहेगा तो एक दिन मेरी कलम का लोहा सब मान लेंगे।
तूफानों के रुख को मोड़ना ही मेरी असली निशानी है,
कठिन संघर्षों के पन्नों पर लिखी मेरी कहानी है।
बाधाएं तो बस इम्तिहान लेती हैं मेरे अटूट सब्र का,
हार को धूल चटाना ही ′सेठी' की असली जवानी है।
माना कि हम थोड़े धीमे हैं, पर मैदान में डटकर खड़े रहेंगे,
जब तक रगों में जान है, हम अपने नाम के लिए लड़ेंगे।
मैदान छोड़कर भाग जाना, हमारी आदत में नहीं सेठी,
जब तक साँसें चलेंगी, हम ज़िद बनकर दुनिया में चमकेंगे।
इन आँखों में अब हमने, कुछ सुनहरे सपने सजा लिए हैं,
पुरानी लकीरें मिटाकर, हमने नए रास्ते बना लिए हैं।
अब बातों का समय नहीं रहा, बस कुछ कर दिखाने की बारी है,
सफलता की खातिर हमने, अपने दिन-रात जला लिए हैं।
जो गिरकर संभलना जानते हैं, वही ऊँची उड़ान भरते हैं,
अपना हुनर छिपाकर रखते हैं, जो समझदारी से काम करते हैं।
जब खुद सीख रहे हो उड़ना, तो सबको ज्ञान मत देना,
मंज़िल वही पाते हैं, जो अपनी सीमा में आगे बढ़ते हैं।
इरादों में जान हो तो पत्थर भी पानी बन जाता है,
सच्चा जुनून ही मंज़िल की असली निशानी बन जाता है।
′सेठी' को ज़रूरत नहीं किसी जिस्मानी ताकत की,
जब हौसला बुलंद हो तो हर शख्स तूफानी बन जाता है।
जब वो चढ़ने लगी और रूह को तंग करने लगी,
सुकून के बदले ज़िंदगी में जंग करने लगी।
हौसला कर के मैंने उसे खुद से दूर कर दिया,
जब वो शराब मेरी साख को बेरंग करने लगी।
भटकने लगी थी राहें और होश भी तंग करने लगे थे,
मेरे अपने ही साये मुझसे अब जंग करने लगे थे।
हद से गुज़रने लगी थी जब वो बेहिसाब मदहोशियाँ,
तो हमने भी खुद को रोक लिया और इरादे बुलंद करने लगे थे।
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