Chaashni Songtext
von Bhaktaaa
Chaashni Songtext
आ के भी नहीं आता हूँ मैं बाज़
अपने कल से हूँ नाराज़
पर बदल नहीं सकते past
तो अब रहता हूँ नहीं उदास
ये बस घिसते रहें चिराग़
मेरी ख़्वाहिशें ५०
पूरे १०० का है प्रयास
नहीं चखना चाहता कभी हार
तो करूँ नहीं ज़्यादा लिहाज़
जागूँ मैं रातों को आज भी
बची नहीं सीने में जान भी
जो भी थी, गानों में डाल दी
आँखों ने देखे हैं ख़्वाब
लेकर ही मानूँगा ताज भी
जलन है चेहरे पे साफ़
हैं बातें क्यूँ लोगों की चाशनी?
हम मेहनती लौंडे हैं, हाँ-जी
इन हाथों को लेने दूँ साँस नहीं
ये चीखे, चिल्ला रहे, पर बैठा मैं ऊपर हूँ
इतना कि आ रही आवाज़ नहीं
जब होती बौछार है प्यार की
तो साथ में नफ़रत है लाज़मी
ये फ़िकर नहीं करते हैं जान की
कम होती है क़ीमत औज़ार की
कम हो जाती क़ीमत इंसान की
जब वो नहीं करता है क़ीमत ज़बान की
हाँ, जैसे कोई भूल जाए
करना परवाह उधार पे लिए सामान की
हाँ, तभी तो industry वालों के आगे
नहीं रखता मैं अपना व्यवहार ठीक
हालातों ने बनाया लालची
भेजे में चले बस, करे जा क्रांति
Uh, ज़िंदगी खेल है ये हार-जीत
करा सब, फिर भी मिले ना शांति
मेरा नौकरी करना मजबूरी है
घर बैठे खानी नहीं रोटी हराम की
जब ठीक से नीव नहीं डाली
तो कैसे खड़ा करेगा ये मकान भी?
माँ बोली, "करता रह काम तू लगन से
मेहनत ही कमज़ोरी होती है हार की"
तभी तो मैं आता नहीं हूँ बाज़
है बनाना कल को ख़ास
चमकूँ बन सितारा
हर जगह पे चर्चा में हो नाम
होगी मेरे पे ख़ुद की car
तो शीशे ऊपर, कम आवाज़
बंदों की नहीं सुनी कल
ना सुनूँगा आज, बस करूँगा राज
मैं करूँ नहीं ज़्यादा लिहाज़
जागूँ मैं रातों को आज भी
बची नहीं सीने में जान भी
जो भी थी, गानों में डाल दी
आँखों ने देखे हैं ख़्वाब
लेकर ही मानूँगा ताज भी
जलन है चेहरे पे साफ़
हैं बातें क्यूँ लोगों की चाशनी?
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
अपने कल से हूँ नाराज़
पर बदल नहीं सकते past
तो अब रहता हूँ नहीं उदास
ये बस घिसते रहें चिराग़
मेरी ख़्वाहिशें ५०
पूरे १०० का है प्रयास
नहीं चखना चाहता कभी हार
तो करूँ नहीं ज़्यादा लिहाज़
जागूँ मैं रातों को आज भी
बची नहीं सीने में जान भी
जो भी थी, गानों में डाल दी
आँखों ने देखे हैं ख़्वाब
लेकर ही मानूँगा ताज भी
जलन है चेहरे पे साफ़
हैं बातें क्यूँ लोगों की चाशनी?
हम मेहनती लौंडे हैं, हाँ-जी
इन हाथों को लेने दूँ साँस नहीं
ये चीखे, चिल्ला रहे, पर बैठा मैं ऊपर हूँ
इतना कि आ रही आवाज़ नहीं
जब होती बौछार है प्यार की
तो साथ में नफ़रत है लाज़मी
ये फ़िकर नहीं करते हैं जान की
कम होती है क़ीमत औज़ार की
कम हो जाती क़ीमत इंसान की
जब वो नहीं करता है क़ीमत ज़बान की
हाँ, जैसे कोई भूल जाए
करना परवाह उधार पे लिए सामान की
हाँ, तभी तो industry वालों के आगे
नहीं रखता मैं अपना व्यवहार ठीक
हालातों ने बनाया लालची
भेजे में चले बस, करे जा क्रांति
Uh, ज़िंदगी खेल है ये हार-जीत
करा सब, फिर भी मिले ना शांति
मेरा नौकरी करना मजबूरी है
घर बैठे खानी नहीं रोटी हराम की
जब ठीक से नीव नहीं डाली
तो कैसे खड़ा करेगा ये मकान भी?
माँ बोली, "करता रह काम तू लगन से
मेहनत ही कमज़ोरी होती है हार की"
तभी तो मैं आता नहीं हूँ बाज़
है बनाना कल को ख़ास
चमकूँ बन सितारा
हर जगह पे चर्चा में हो नाम
होगी मेरे पे ख़ुद की car
तो शीशे ऊपर, कम आवाज़
बंदों की नहीं सुनी कल
ना सुनूँगा आज, बस करूँगा राज
मैं करूँ नहीं ज़्यादा लिहाज़
जागूँ मैं रातों को आज भी
बची नहीं सीने में जान भी
जो भी थी, गानों में डाल दी
आँखों ने देखे हैं ख़्वाब
लेकर ही मानूँगा ताज भी
जलन है चेहरे पे साफ़
हैं बातें क्यूँ लोगों की चाशनी?
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
(चाशनी, चाशनी)
Writer(s): Keshav Bhugra Lyrics powered by www.musixmatch.com

