Akela Songtext
von BAWA
Akela Songtext
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
अकेले ही रहने की आदत है
अकेले ही सहने की आदत है
है, आदत है सब कुछ छुपाने की
किसी को कुछ भी ना बताने की
मैं रातों की बाँहों में रहता हूँ
मैं सबकी निगाहों में रहता हूँ
उसके ही आँखों ने थामा था
उसके ही ग़म अब सहता हूँ
काली इन रातों का क्या है?
सजनी के वादों का क्या है?
कभी इस से तो कभी उस से
प्यार भरी बातों का क्या है?
बातों ही बातों में जाना मैं
मैं फिरता यूँ ही, दीवाना मैं
उसके तो हाथों में ख़ंजर था
उसे कैसे ना पहचाना मैं?
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
आँखों में पट्टी जो बाँधी तूने प्यार की तेरे
मैं समझ नहीं पाया सर पे तलवार थी मेरे
तूने उनको लड़ाया जिनमें कभी प्यार था गहरा
मैंने सब कुछ भुलाया, भुला नहीं कभी तेरा चेहरा
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
अकेले ही रहने की आदत है
अकेले ही सहने की आदत है
है, आदत है सब कुछ छुपाने की
किसी को कुछ भी ना बताने की
मैं रातों की बाँहों में रहता हूँ
मैं सबकी निगाहों में रहता हूँ
उसके ही आँखों ने थामा था
उसके ही ग़म अब सहता हूँ
काली इन रातों का क्या है?
सजनी के वादों का क्या है?
कभी इस से तो कभी उस से
प्यार भरी बातों का क्या है?
बातों ही बातों में जाना मैं
मैं फिरता यूँ ही, दीवाना मैं
उसके तो हाथों में ख़ंजर था
उसे कैसे ना पहचाना मैं?
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
आँखों में पट्टी जो बाँधी तूने प्यार की तेरे
मैं समझ नहीं पाया सर पे तलवार थी मेरे
तूने उनको लड़ाया जिनमें कभी प्यार था गहरा
मैंने सब कुछ भुलाया, भुला नहीं कभी तेरा चेहरा
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
हाँ, धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
धीरे-धीरे ग़म अब सह लेंगे हम
रहना अकेले ही, रह लेंगे हम
पर जीना नहीं तेरे संग
पर जीना नहीं तेरे संग
Writer(s): Sumit Kumar Lyrics powered by www.musixmatch.com
