Dastaan-E-Om Shanti Om Songtext
von Shaan
Dastaan-E-Om Shanti Om Songtext
सुनने वालों
सुनो, ऐसा भी होता है
दिल देता है जो
वो जान भी खोता है
प्यार ऐसा जो करता है
क्या मर के भी मरता है?
आओ, तुम भी आज सुन लो
दास्ताँ है ये कि एक था नौजवाँ
जो दिल ही दिल में एक हसीना का था दीवाना
वो हसीना थी कि जिसकी ख़ूबसूरती का
दुनिया-भर में था मशहूर अफ़साना
दोनों की ये कहानी है जिसको सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
नौजवाँ की थी आरज़ू
उसकी थी ये ही जुस्तुजू
उस हसीना में उसको मिले
इश्क़ के सारे रंग-ओ-बू
नौजवाँ की थी आरज़ू
उसकी थी ये ही जुस्तुजू
उस हसीना में उसको मिले
इश्क़ के सारे रंग-ओ-बू
उसने ना जाना, ये नादानी है
वो रेत को समझा कि पानी है
क्यूँ ऐसा था, किस लिए था
ये कहानी है
दास्ताँ है ये कि उस दिलकश हसीना के
निगाह-ओ-दिल में कोई दूसरा ही था
बेख़बर इस बात से, उस नौजवाँ के ख़्वाबों का
अंजाम तो होना बुरा ही था
टूटे ख़्वाबों की इस दास्ताँ को सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
सुनने वालों
सुनो, ऐसा भी होता है
कोई जितना हँसे
उतना ही रोता है
दीवानी हो के हसीना
खाई क्या धोखे हसीना
आओ, तुम भी आज सुन लो
दास्ताँ है ये कि उस मासूम हसीना ने जिसे चाहा
वो था अंदर से हरजाई
संग-दिल से दिल लगा के, बेवफ़ा के हाथ आ के
उसने एक दिन मौत ही पाई
एक सितम का फ़साना है जिसको सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
क्यूँ कोई क़ातिल समझता नहीं?
ये जुर्म वो है जो छुपता नहीं
ये दाग़ वो है जो मिटता नहीं
रहता है ख़ूनी के हाथ पर
ख़ून उस हसीना का जब था हुआ
कोई वहाँ था पहुँच तो गया
लेकिन उसे वो बचा ना सका
रोया था प्यार उसकी मौत पर
(रोया था प्यार उसकी मौत पर)
दास्ताँ है ये कि जो पहचानता है ख़ूनी को
वो नौजवाँ है लौट के आया
कह रही है ज़िंदगी, "क़ातिल समझ ले
उसके सर पे छा चुका है मौत का साया"
जन्मों की, कर्मों की है कहानी जिसे
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
सुनो, ऐसा भी होता है
दिल देता है जो
वो जान भी खोता है
प्यार ऐसा जो करता है
क्या मर के भी मरता है?
आओ, तुम भी आज सुन लो
दास्ताँ है ये कि एक था नौजवाँ
जो दिल ही दिल में एक हसीना का था दीवाना
वो हसीना थी कि जिसकी ख़ूबसूरती का
दुनिया-भर में था मशहूर अफ़साना
दोनों की ये कहानी है जिसको सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
नौजवाँ की थी आरज़ू
उसकी थी ये ही जुस्तुजू
उस हसीना में उसको मिले
इश्क़ के सारे रंग-ओ-बू
नौजवाँ की थी आरज़ू
उसकी थी ये ही जुस्तुजू
उस हसीना में उसको मिले
इश्क़ के सारे रंग-ओ-बू
उसने ना जाना, ये नादानी है
वो रेत को समझा कि पानी है
क्यूँ ऐसा था, किस लिए था
ये कहानी है
दास्ताँ है ये कि उस दिलकश हसीना के
निगाह-ओ-दिल में कोई दूसरा ही था
बेख़बर इस बात से, उस नौजवाँ के ख़्वाबों का
अंजाम तो होना बुरा ही था
टूटे ख़्वाबों की इस दास्ताँ को सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
सुनने वालों
सुनो, ऐसा भी होता है
कोई जितना हँसे
उतना ही रोता है
दीवानी हो के हसीना
खाई क्या धोखे हसीना
आओ, तुम भी आज सुन लो
दास्ताँ है ये कि उस मासूम हसीना ने जिसे चाहा
वो था अंदर से हरजाई
संग-दिल से दिल लगा के, बेवफ़ा के हाथ आ के
उसने एक दिन मौत ही पाई
एक सितम का फ़साना है जिसको सभी
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
क्यूँ कोई क़ातिल समझता नहीं?
ये जुर्म वो है जो छुपता नहीं
ये दाग़ वो है जो मिटता नहीं
रहता है ख़ूनी के हाथ पर
ख़ून उस हसीना का जब था हुआ
कोई वहाँ था पहुँच तो गया
लेकिन उसे वो बचा ना सका
रोया था प्यार उसकी मौत पर
(रोया था प्यार उसकी मौत पर)
दास्ताँ है ये कि जो पहचानता है ख़ूनी को
वो नौजवाँ है लौट के आया
कह रही है ज़िंदगी, "क़ातिल समझ ले
उसके सर पे छा चुका है मौत का साया"
जन्मों की, कर्मों की है कहानी जिसे
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
कहते हैं, "ओम शांति ओम"
Writer(s): Javed Akhtar Lyrics powered by www.musixmatch.com

